ज़िन्दगी तो मौन है

 जिन्दगी तो मौन है 

कहती नहीं, बस बहती है
कभी धूप, कभी छाँव
कभी गम, कभी खुशी
सबको समेटे, चुपचाप सहती है |

पल-पल बदलती दुनिया के शोर में
वो अपनी धुन में ही रहती है
ना किसी से शिकायत, ना किसी से रार
शांत सागर सी, मौन ही बहती है |

अनकही बातें, अनसुने अफ़साने
दिल के गहरे राज छिपाती है
कभी आँचल में खुशियों को बांधे
कभी आँसुओं की नदी बहाती है |

मौन में ही शक्ति, मौन में ही ज्ञान
ये चुपचाप बहुत कुछ समझाती है
कभी रुकती नहीं, कभी झुकती नहीं
ज़िन्दगी तो बस चलती ही जाती है |

तो क्यों करें शोर, क्यों करें रार
जब मौन ही इस जीवन का सार है 
जी लें हर पल, हर लम्हे को हम
क्योंकि ज़िन्दगी तो मौन है,उपहार है |

                     -डॉ नसीम अहमद 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हारा नहीं हूँ मैं