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हारा नहीं हूँ मैं

  हारा नहीं हूँ मैं थका हूँ, टूटा हूँ, पर बिखरा नहीं हूँ, अंधेरे से डर कर कभी ठहरा नहीं हूँ। हर एक मोड़ ने आज़माया मुझे, पर हालातों से कभी डरा नहीं हूँ। ज़ख़्म मिले हैं, पर सुरूर नहीं है, आँखों में आँसू हैं, गुरूर नहीं है। झुका नहीं हूँ, किसी के आगे, झुकना मुझे मंजूर नहीं है । हर हार ने कुछ सिखाया है मुझे, गिरने के बाद उठना सिखाया है मुझे। अब जंग मेरी आदत बन गई है, और जीत मेरी ज़रूरत बन गई है। जो कहते हैं — “अब नहीं हो पाएगा”, उन्हें हर बार करके दिखाया है। मैं लहरों से नहीं डरता, मैंने तूफ़ानों में रास्ता बनाया है। क्योंकि हारा नहीं हूँ मैं...

ज़िन्दगी तो मौन है

  जिन्दगी तो मौन है   कहती नहीं, बस बहती है कभी धूप, कभी छाँव कभी गम, कभी खुशी सबको समेटे, चुपचाप सहती है | पल-पल बदलती दुनिया के शोर में वो अपनी धुन में ही रहती है ना किसी से शिकायत, ना किसी से रार शांत सागर सी, मौन ही बहती है | अनकही बातें, अनसुने अफ़साने दिल के गहरे राज छिपाती है कभी आँचल में खुशियों को बांधे कभी आँसुओं की नदी बहाती है | मौन में ही शक्ति, मौन में ही ज्ञान ये चुपचाप बहुत कुछ समझाती है कभी रुकती नहीं, कभी झुकती नहीं ज़िन्दगी तो बस चलती ही जाती है | तो क्यों करें शोर, क्यों करें रार जब मौन ही इस जीवन का सार है  जी लें हर पल, हर लम्हे को हम क्योंकि ज़िन्दगी तो मौन है,उपहार है |                      -डॉ नसीम अहमद